"आसान हज " वालिदे मोहतरम हज़रत
मौलाना मु० मंजूर नोमानी की हज से मुताल्लिक
बहुत मक़बूल व मशहूर किताब है। इस किताब
के उर्दू ज़बान में अब तक 33 एडीशन शाय
हो चुके हैं।
1983 में यह हिन्दी ज़बान में भी शाय
हुई थी। लेकिन तर्जूमे की ज़बान कंठिन होने
के कारण इसको वह मक़बूलियत हासिल न
हो सकी जो उर्दू को हासिल है। इधर कई
साल से लोगों का बेहद इसरार है कि इसका
आसान हिन्दी एडीशन शाय किया जाए। लेकिन
इदारा कुछ ऐसे कामों में मसरूफ था कि यह
फरमाइश पूरी न की जा सकी। please read Asan Haz Islamic Hindi book.
मौलाना मु० मंजूर नोमानी की हज से मुताल्लिक
बहुत मक़बूल व मशहूर किताब है। इस किताब
के उर्दू ज़बान में अब तक 33 एडीशन शाय
हो चुके हैं।
1983 में यह हिन्दी ज़बान में भी शाय
हुई थी। लेकिन तर्जूमे की ज़बान कंठिन होने
के कारण इसको वह मक़बूलियत हासिल न
हो सकी जो उर्दू को हासिल है। इधर कई
साल से लोगों का बेहद इसरार है कि इसका
आसान हिन्दी एडीशन शाय किया जाए। लेकिन
इदारा कुछ ऐसे कामों में मसरूफ था कि यह
फरमाइश पूरी न की जा सकी। please read Asan Haz Islamic Hindi book.
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