श्रीनारायण भक्ति पंथ भारत में एक मात्र ऐसा पंथ है जो सनातन अजन्मा अविनाशी भगवान विष्णु के मूल स्वरूप की सेवा पूजा और भक्ति प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। इस पंथ के प्रवर्तक आचार्य सद्गुरु श्रीलोकेशानंदजी महाराज है। इस पंथ का मूल उद्देश्य सत्य भक्ति का प्रचार है। घर- घर में श्रीनारायण के स्वरुप की स्थापना करना एवं मंदिर निर्माण करते हुये पंथ आगे बढ़ रहा है। महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में स्थित शहादा तहसील में एक विशाल मंदिर आकार ले रहा है। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में पंथ का एक स्थान स्थित है। अनेकों शहरों में पंथ के विष्णु भक्त बढ़ रहे हैं।
संसार में भारत भूमि विश्व को अपने धर्म और संस्कृति के प्रभाव से प्रकाशित करती रही है। इस भारत भूमि में जन्म पाने वाले कीट-पतंग भी देवताओं से अधिक भाग्यशाली है। क्योंकि इस भारत भूमि में जन्म लेने वाले जीव अवतारों, महापुरूषों, सद्गुरूओं की चरणरज से धन्य होकर मुक्ति पथ पर अग्रसर हो जाते हैं। संसार में केवल भारतभूमि को ही धर्म भूमि कहा जाता है। यहाँ के कण-कण में धर्म धबकता है। इसलिए तो भगवान भी बार-बार यहाँ अवतार लेने को आतुर रहते हैं। श्रीभगवान की कृपा ने इस भारतभूमि में म.प्र. इन्दौर में श्रीभगवान नारायण कृपा मुर्ति संत श्रेष्ठ लोकेशानंदजी महाराज के रूप में मनुष्य देह धारण किया। जिन्होने अल्प आयु में ही सम्पूर्ण भारत में एक ऐस भक्ति आंदोलन को जन्म दिया जिससे देश आज धर्म की काया पलट होने लगी है। वे संवत 2036 माघ शुक्ल बदी (21 फरवरी 1980) को ब्राह्मण कुल में प्रकट हुए वे 15 वर्ष की अल्पायु में एक दिन अचानक तीव्र वैराग्य हो जाने से ईश्वर प्राप्ति को लक्ष्य बनाकर परमपथ की यात्रा पर निकले। पहले आपने भारत में कुछ सम्प्रदायों का अवलोकन किया फिर सभी तीर्थो की कठिनतम यात्राऐं की, फिर तीव्र तपश्चर्या में लगकर भगवान का साक्षात्कार किया। इस तरह भगवद्निष्ठा में रहने के पश्चात् पूर्ण ब्रह्मनिष्ठ होकर अपने श्रीनारायण भक्ति पंथ के रूप में एक विशाल भक्ति आंदोलन का शंखनाद किया और अल्प अवधि में ही जन-जन के हृदय में श्रीभगवान की दिव्य छवि प्रस्थापित की। उनका महाकर्षण इतना दिव्य है कि बड़े-बड़े महिमा मंडित मस्तक भी उनके आगे विनम्रता से झुक जाते है। उन्होंने अनेकों के जीवन पवित्रता से भरे है। पूरे समाज को एक जुटता में बांधा है। पाश्चात्य संस्कृति का कुप्रभाव शिथिल कर ज्ञान का प्रकाश फैलाया है।
श्रीगुरूदेव ने युवावय में ही श्रीनारायण भक्ति पंथ की स्थापना कर हरिभक्तों का संघ बनाया और अपनी वाणी तथा वर्तन से ही धर्म प्रेरणा की अनुपम भागीरथी प्रवाहित की। नित्यवंदनीय, परमपुज्य संतश्रेष्ठ लोकेशानंदजी महाराज के जीवनकार्य से प्रभावित एक साहित्यकार लिखते हैं-अपने दिव्य तेज से असंख्य हृदयों को प्रकाशित करने वाले अनेकों के चित्त अपनी ओर आकर्षित करने वाले अनेकों के व्यसन, विकारों तथा चौर्यवृत्ति, हिंसावृत्ति को नष्ट करने वाले, निकुंश तथा स्वच्छांछीयो को अनुशासित तथा गंभीर करने वाले, असंयमियों को संयम की राह पर लाने वाले, आचारभ्रष्टों को आचार शुद्धि सिखाने वाले, पतितों को पावन करने वाले, समाज मे स्त्रीयों को श्रेष्ठ सम्मान और उच्च स्थान देने वाले, समाज में साहित्य एवं संगीत कला का पोषण करने वाले, समाज में वहम और अंधविश्वासों को दूर करने वाले, शांति और क्षमा इस दिव्य सुत्र को जन-जन के हृदय में प्रस्थापित करने वाले, भक्तिमार्ग, ज्ञान मार्ग तथा सेवा धर्म के संस्थापक तथा गीता, भागवत ग्रंथों के सिद्धांतों के बोधक है संतश्रीलोकेशानंद जी। श्रीभगवान की उपासना और भक्ति की प्रस्थापना के लिये श्रगुरूदेव ने विभिन्न शहरों में श्रीनारायण भक्ति पंथ के धर्म स्थलों का निर्माण प्रारंभ करवाया है। ये स्थान धर्म उपासना और सेवा की त्रिवेणी के संगम स्थल है। श्रीगुरूदेव ने हरिभक्तों को तीन महाव्रत देकर शुद्ध किया। 1. नियम 2. नित्य सत्संग 3. नित्य सेवा।
श्रीगुरूदेव ने समाज के युवाओं के उत्थान हेतु भी संस्कार दान का अभियान चलाया और असंख्य युवकों को ज्ञान उद्बोधन प्रदान कर धर्माभिमुख किया। श्रीगुरूदेव के उद्बोधनों से आज के निरंकुश और विलासी युवा मानस को जीवन के सच्चे आदर्शों और सद्गुणों का ज्ञान हुआ। आज आप युवकों को दीक्षित कर उन्हें धर्मसाधना के मार्ग पर ला रहें है। श्रीभगवान नारायण की भक्ति के दिव्य आनंद में लीन रहने वाले भगवद्साक्षात्कार प्राप्त परमहंस संत श्रेष्ठ श्रीगुरूदेव का सानिध्य, सत्संग और मार्गदर्शन इस भुतल पर सुख शांति और परमानंद की वृद्धि करेगा।
पता:
*श्रीनारायणपूरम तीर्थ (श्रीमंदिर )
लोणखेड़ा कॉलेज के सामने ,शाहदा
जिला- नंदुरबार ,महाराष्ट्र, पिन कोड 425409
🌷पंथ से संपर्क करने हेतु
8551930121
9300851511
संसार में भारत भूमि विश्व को अपने धर्म और संस्कृति के प्रभाव से प्रकाशित करती रही है। इस भारत भूमि में जन्म पाने वाले कीट-पतंग भी देवताओं से अधिक भाग्यशाली है। क्योंकि इस भारत भूमि में जन्म लेने वाले जीव अवतारों, महापुरूषों, सद्गुरूओं की चरणरज से धन्य होकर मुक्ति पथ पर अग्रसर हो जाते हैं। संसार में केवल भारतभूमि को ही धर्म भूमि कहा जाता है। यहाँ के कण-कण में धर्म धबकता है। इसलिए तो भगवान भी बार-बार यहाँ अवतार लेने को आतुर रहते हैं। श्रीभगवान की कृपा ने इस भारतभूमि में म.प्र. इन्दौर में श्रीभगवान नारायण कृपा मुर्ति संत श्रेष्ठ लोकेशानंदजी महाराज के रूप में मनुष्य देह धारण किया। जिन्होने अल्प आयु में ही सम्पूर्ण भारत में एक ऐस भक्ति आंदोलन को जन्म दिया जिससे देश आज धर्म की काया पलट होने लगी है। वे संवत 2036 माघ शुक्ल बदी (21 फरवरी 1980) को ब्राह्मण कुल में प्रकट हुए वे 15 वर्ष की अल्पायु में एक दिन अचानक तीव्र वैराग्य हो जाने से ईश्वर प्राप्ति को लक्ष्य बनाकर परमपथ की यात्रा पर निकले। पहले आपने भारत में कुछ सम्प्रदायों का अवलोकन किया फिर सभी तीर्थो की कठिनतम यात्राऐं की, फिर तीव्र तपश्चर्या में लगकर भगवान का साक्षात्कार किया। इस तरह भगवद्निष्ठा में रहने के पश्चात् पूर्ण ब्रह्मनिष्ठ होकर अपने श्रीनारायण भक्ति पंथ के रूप में एक विशाल भक्ति आंदोलन का शंखनाद किया और अल्प अवधि में ही जन-जन के हृदय में श्रीभगवान की दिव्य छवि प्रस्थापित की। उनका महाकर्षण इतना दिव्य है कि बड़े-बड़े महिमा मंडित मस्तक भी उनके आगे विनम्रता से झुक जाते है। उन्होंने अनेकों के जीवन पवित्रता से भरे है। पूरे समाज को एक जुटता में बांधा है। पाश्चात्य संस्कृति का कुप्रभाव शिथिल कर ज्ञान का प्रकाश फैलाया है।
श्रीगुरूदेव ने युवावय में ही श्रीनारायण भक्ति पंथ की स्थापना कर हरिभक्तों का संघ बनाया और अपनी वाणी तथा वर्तन से ही धर्म प्रेरणा की अनुपम भागीरथी प्रवाहित की। नित्यवंदनीय, परमपुज्य संतश्रेष्ठ लोकेशानंदजी महाराज के जीवनकार्य से प्रभावित एक साहित्यकार लिखते हैं-अपने दिव्य तेज से असंख्य हृदयों को प्रकाशित करने वाले अनेकों के चित्त अपनी ओर आकर्षित करने वाले अनेकों के व्यसन, विकारों तथा चौर्यवृत्ति, हिंसावृत्ति को नष्ट करने वाले, निकुंश तथा स्वच्छांछीयो को अनुशासित तथा गंभीर करने वाले, असंयमियों को संयम की राह पर लाने वाले, आचारभ्रष्टों को आचार शुद्धि सिखाने वाले, पतितों को पावन करने वाले, समाज मे स्त्रीयों को श्रेष्ठ सम्मान और उच्च स्थान देने वाले, समाज में साहित्य एवं संगीत कला का पोषण करने वाले, समाज में वहम और अंधविश्वासों को दूर करने वाले, शांति और क्षमा इस दिव्य सुत्र को जन-जन के हृदय में प्रस्थापित करने वाले, भक्तिमार्ग, ज्ञान मार्ग तथा सेवा धर्म के संस्थापक तथा गीता, भागवत ग्रंथों के सिद्धांतों के बोधक है संतश्रीलोकेशानंद जी। श्रीभगवान की उपासना और भक्ति की प्रस्थापना के लिये श्रगुरूदेव ने विभिन्न शहरों में श्रीनारायण भक्ति पंथ के धर्म स्थलों का निर्माण प्रारंभ करवाया है। ये स्थान धर्म उपासना और सेवा की त्रिवेणी के संगम स्थल है। श्रीगुरूदेव ने हरिभक्तों को तीन महाव्रत देकर शुद्ध किया। 1. नियम 2. नित्य सत्संग 3. नित्य सेवा।
श्रीगुरूदेव ने समाज के युवाओं के उत्थान हेतु भी संस्कार दान का अभियान चलाया और असंख्य युवकों को ज्ञान उद्बोधन प्रदान कर धर्माभिमुख किया। श्रीगुरूदेव के उद्बोधनों से आज के निरंकुश और विलासी युवा मानस को जीवन के सच्चे आदर्शों और सद्गुणों का ज्ञान हुआ। आज आप युवकों को दीक्षित कर उन्हें धर्मसाधना के मार्ग पर ला रहें है। श्रीभगवान नारायण की भक्ति के दिव्य आनंद में लीन रहने वाले भगवद्साक्षात्कार प्राप्त परमहंस संत श्रेष्ठ श्रीगुरूदेव का सानिध्य, सत्संग और मार्गदर्शन इस भुतल पर सुख शांति और परमानंद की वृद्धि करेगा।
पता:
*श्रीनारायणपूरम तीर्थ (श्रीमंदिर )
लोणखेड़ा कॉलेज के सामने ,शाहदा
जिला- नंदुरबार ,महाराष्ट्र, पिन कोड 425409
🌷पंथ से संपर्क करने हेतु
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