About Om Koshish
Om Koshish :---
ॐ कोशिश : सामाजिक-संस्था ही नहीं, अपितु एक विचार है. अपने आत्मविश्वास, परिश्रम, समर्पण, सहयोग, समन्वय और सामंजस्य से सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता पैदा करना है.
यह मात्र एक विचार ही नहीं है अपितु इस दिशा में किए गए छोटे छोटे प्रयास आज नया कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं. मलिन थारू बस्ती, हल्दीघाटी एवं अंतर्नाद सम्मान की परम्परा व तमसा तट पर स्थापित सर्वेश्वरी मुक्तिधाम इसके जीवंत प्रमाण हैं. अपने आसपास एक पहल कर जनचेतना को जागृत करना की ॐ कोशिश का ध्येय है.
ऊँ कोशिश “अंतर्नाद” काव्य मंच के माध्यम से युवामन मन और राष्ट्रीय आत्मिका के साथ साहित्यिक परम्परा का सृजन करते हुए “नव लेखन को नव आयाम” तथा “प्रसिद्धों से दूर सिद्धो तक” तक की खोज करते हुए भारतवर्ष मे उन्हे सम्मानित कर रही है।
आदिछंद की जननी तमसा तट के मऊ जनपद से इसकी यात्रा प्रारम्भ होकर आध्यात्मिक नगरी काशी, प्रयागराज में इसकी गतिविधियों का सक्रिय संचालन किया जा रहा है. इसके साथ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, एवं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी अंतर्नाद के माध्यम से स्वस्थ लेखन व साहित्यिक शुचिता को बल देने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है. साहित्य में विविध विधाओं का समावेश करते हुए एक स्वस्थ, समावेशी साहित्यिक पीठ के सृजन के लिए संस्था प्रतिबद्ध है.
ॐ कोशिश : सामाजिक-संस्था ही नहीं, अपितु एक विचार है. अपने आत्मविश्वास, परिश्रम, समर्पण, सहयोग, समन्वय और सामंजस्य से सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता पैदा करना है.
यह मात्र एक विचार ही नहीं है अपितु इस दिशा में किए गए छोटे छोटे प्रयास आज नया कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं. मलिन थारू बस्ती, हल्दीघाटी एवं अंतर्नाद सम्मान की परम्परा व तमसा तट पर स्थापित सर्वेश्वरी मुक्तिधाम इसके जीवंत प्रमाण हैं. अपने आसपास एक पहल कर जनचेतना को जागृत करना की ॐ कोशिश का ध्येय है.
ऊँ कोशिश “अंतर्नाद” काव्य मंच के माध्यम से युवामन मन और राष्ट्रीय आत्मिका के साथ साहित्यिक परम्परा का सृजन करते हुए “नव लेखन को नव आयाम” तथा “प्रसिद्धों से दूर सिद्धो तक” तक की खोज करते हुए भारतवर्ष मे उन्हे सम्मानित कर रही है।
आदिछंद की जननी तमसा तट के मऊ जनपद से इसकी यात्रा प्रारम्भ होकर आध्यात्मिक नगरी काशी, प्रयागराज में इसकी गतिविधियों का सक्रिय संचालन किया जा रहा है. इसके साथ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, एवं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी अंतर्नाद के माध्यम से स्वस्थ लेखन व साहित्यिक शुचिता को बल देने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है. साहित्य में विविध विधाओं का समावेश करते हुए एक स्वस्थ, समावेशी साहित्यिक पीठ के सृजन के लिए संस्था प्रतिबद्ध है.